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A : Adult-Female-Web-cam-Group@googlegroups.com 5 October 2008 • 11:09PM -0400

[ADULT] [hindi sexi stori] शालिनी की कहानी
by Raj Sharma

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शालिनी की कहानी
हेल्लो दोस्तों मैं यानि आपका दोस्त राज शर्मा आपके लिए एक और कहानी लाकर हाजिर हूँ ये कहानी एक एक ऐसी ओरत की है जो अपने पापी से संतुस्ट नहीं हो पाती थी
mera नाम शालिनी है। मेरी शादी को 2 साल हो चुके है। मैं अपनी सेक्स लाइफ के बारे में लिख रही हून. मेरे हज़्बेंड का नाम रजत है. मैं बहुत ही सेक्सी हून. जब मेरी शादी हुई थी तब मैं एक दम दुबली पतली थी लेकिन अब कुच्छ मोटी हो गयी हून. आज भी मैं बहुत ही ज़्यादा सेक्सी हून और खूब मज़े ले ले कर चुड़वति हून. मेरी उमर अब 24 साल है. जब मेरी शादी हुई थी तब मेरी उमर 22 साल और उनकी उमर 25 साल की थी. मेरा
हज़्बेंड का लुन्ड बहुत ही छोट है. उनका लुन्ड खड़ा होने के बाद भी केवल 4" या साढ़े चार इंच लंबा और 1.5" मोटा है. जब मेरी शादी हुई थी तब मेरी छूट बहुत टाइट और छोटि थी. सुहग्रात को जब उन्होने अपने छोटे से लुन्ड से मुझे छोड़ा तो मेरी छूट से खून आ गया था. सुहग्रात के दिन उन्होने मुझे 5 बार छोड़ा था. मैं बहुत ही सेक्सी हून. उनके छोटे से लुन्ड से मेरी प्यास नहीं बुझ पति थी. मैं खूब मोटा और
लंबा लुन्ड अपनी छूट में लेना चाहती थी. लेकिन शरम के मारे कुच्छ कह नहीं पति थी. लगभग 1॥5 साल तक मैं उनसे खूब चुड़वति रही लेकिन मुझे पूरी तरह मज़ा नहीं आता था. वो मुझको छोड़ते समय बहुत जल्दी झाड़ जाते थे. वो मेरी चुदाई कभी भी 5-10 मिनिट से ज़्यादा नहीं कर पाते थे. मैं इस बात को समझती थी की उनका लुन्ड छोट है इसलिए वो मुझे पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाते थे. एक दिन मैने उनसे कहा, "रजत,
तुम्हारा लुन्ड तो किसी बच्चे की तरह है और बहुत ही छोट है. मुझे तुम्हारे लुन्ड से पूरा मज़ा नहीं आता और मैं भूखही ही रह जाती हून. मैने काई मर्दों को पेशाब करते हुए देखा है. उन सबका लुन्ड ढीला रहने पर भी तुम्हारे लुन्ड से बहुत लंबा और मोटा था. वो जब खड़ा होता होगा तब कितना लंबा और मोटा हो जाता होगा. शायद इसीलिए मुझे तुम्हारे लुन्ड से छुड़वाने में मज़ा नहीं आता. मैं अपनी छूट में
और ज़्यादा लंबे और मोटे लुन्ड को अंदर लेना चाहती हून. मेरी शादी को अब डेढ़ साल हो गये हैं. मैं अब तक शरम के मारे तुमसे कुच्छ बोल नहीं पा रही थी लेकिन अब मैं अपनी भूख को ज़्यादा दिन बर्दस्त नहीं कर पा रही हून. जब तुमने मुझे सुहग्रात के दिन छोड़ा था तब मेरी छूट एक दम टाइट थी और मुझे केवल 2-4 दीनो तक ही तोड़ा बहुत मज़ा आया. मैं कई दिनों से ही तुम्हारे छोटे लुन्ड के बारे में कहना
चाहती थी॥ लेकिन मैं शरम के मारे कुच्छ भी नहीं बोली. अब हमारी शादी को देढ साल हो गये हैं और मैं तुमसे खुल कर बात कर सकती हून इसलिए मैं आज तुमसे तुम्हारे लुन्ड के बारे में कह रही हून." उन्होने कहा, "शालिनी, मैं अपनी कमी जनता हून और तुम्हारे दर्द को समझ सकता हून. मैने बहुत इलाज़ कराया लेकिन ये नहीं बढ़ा. मैं क्या करूँ. तुम ही कुच्छ बताओ. मैं तुम्हें तलाक़ नहीं दे सकता क्यों की मैं
तुमसे बहुत प्यार करता हून. तुम मुझे छ्चोड़ कर मत जाना नहीं तो मैं मार जौंगा.." मैने कहा, "मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हून और तुम्हारा दर्द समझ सकती हून, लेकिन क्या करूँ. तुम्हारी चुदाई से मेरी भूख शांत नहीं होती. पहले तोड़ा बहुत मज़ा भी आता था लेकिन अब तो वो भी नहीं आता." वो सोच में पद गये. कुच्छ देर बाद वो बोले,

"अगर मैं एक मोटी मोमबत्ती ला कर तुम्हें मोमबत्ती से छोड़ डून, तो कैसा रहेगा." मैं कुच्छ देर सोचने के बाद राज़ी हो गयी. डूस'रे दिन वो बाज़ार से एक मोमबत्ती ले आए. उन्होने मुझे वो मोमबत्ती दिखाई तो मैने कहा, "ठीक तो है. वो मोमबत्ती लगभग 8" लंबी और 1.5" मोटी थी. मैने कहा, "लेकिन ये तो आदमियों के लुन्ड से बहुत पतली है. इस से मेरी भूख कुच्छ हद तक शांत हो जाएगी. आओ बेडरूम में चलते हैं. तुम ये
मोमबत्ती मेरी छूट में डाल कर खूब छोड़ो मुझे." हम बेडरूम में आ गये. मैं बेड पर लेट गयी और वो मेरी छूट को चाटने लगे. 2-3 मिनिट में ही मैं पुर जोश में आ गयी और सिसकारियाँ भरने लगी फिर बोली, "रजत, अब देर मत करो. मैं बहुत दीनो से भूखही हून. डाल दो पूरी मोमबत्ती मेरी छूट में और ज़ोर ज़ोर से छोड़ो इस मोमबत्ती से मुझको." वो बोले,
"ठीक है. मैं तुम्हारी छूट में ये मोमबत्ती डाल कर छोड़ता हून और तुम मेरा लुन्ड चूसो. वो मेरे उपर 69 की पोज़िशन में हो गये. मैं उनका लुन्ड चूसने लगी और उन्होने मोमबत्ती को मेरी छूट में डालना शुरू कर दिया. मोमबत्ती उनके लुन्ड से बहुत ज़्यादा मोटी नहीं थी इसलिए आराम से मेरी छूट में लगभग 5" तक घुस गयी. मेरे मून'ह से केवल एक हल्की सी सिसकारी भर निकली. उन्होने मोमबत्ती को मेरी छूट में
और ज़्यादा नहीं डाला और अंदर बाहर करने लगे. मैं सिसकारियाँ भरने लगी. 5 मिनिट तक वो मोमबत्ती को मेरी छूट में अंदर बाहर करते रहे. मैं बहुत ज़्यादा जोश में आ गयी और उनके लुन्ड को और तेज़ी के साथ चूसने लगी. वो समझ गये की अब मैं झड़ने वाली हून और 2 मिनिट में ही मेरी छूट ने पानी छ्चोड़ दिया. मैने कहा, "रजत, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. पूरा अंदर डालो ना इस मोमबत्ती को मेरी छूट में." उन्होने
मोमबत्ती को तोड़ा और ज़्यादा मेरी छूट के अंदर डाला तो मुझे कुच्छ दर्द महसूस हुआ. वो मोमबत्ती अब तक मेरी छूट में 6" तक घुस चुकी थी. मैने कहा, "रुक जाओ रजत, अब और ज़्यादा मत डालो. दर्द हो रहा है. इतना ही अंदर डाल कर छोड़ो मुझे." उन्होने मोमबत्ती को तेज़ी से मेरी छूट में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मैं सिसकारियाँ भरने लगी. वो भी बहुत जोश में आ गये थे और मेरे मून'ह में ही झाड़ गये. मैने
उनके लुन्ड का सारा पानी निगल लिया. वो मोमबत्ती को मेरी छूट में और ज़्यादा तेज़ी के साथ अंदर बाहर करने लगे. 8-10 मिनिट बाद ही मैं फिर से झाड़ गयी और बोली,
"रजत, बहुत मज़ा आ रहा है. काश तुम पहले ही ये मोमबत्ती ले आते और मेरी छूट में डालकर छोड़ते तो मैं इतने दिन भूखही ना रहती. रजत, अब देर ना करो, डाल दो पूरी मोमबत्ती मेरी छूट में और खूब ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करो." उन्होने उस मोमबत्ती को मेरी छूट में पूरा अंदर डाल दिया और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा. मुझे थोड़ी देर के लिए कुच्छ दर्द हुआ लेकिन बाद में मज़ा भी आने लगा. थोड़ी ही देर में
मैं और ज़्यादा जोश में आ गयी और अपना चुत्तऱ उच्छाल उच्छाल कर मोमबत्ती को पूरा अंदर लेने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. अभी 10 मिनिट भी बीता था की मैं फिर से एक बार झाड़ गयी. मैं अब तक 3 बार झाड़ चुकी थी. झड़ने के बाद मैं और जोश में आ गयी और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी, "रजत, मुझे अब बर्दस्त नहीं हो रहा है. खूब तेज़ी के साथ अंदर बाहर करो इस मोमबत्ती को मेरी छूट में." वो भी जोश में आ गये थे और
उनका लुन्ड दूसरी बार फिर से एक दम टन गया था. वो बोले, "शालिनी, मैं भी बहुत जोश में आ गया हून और मेरा लुन्ड फिर से खड़ा हो गया है. अगर तुम कहो तो मैं एक बार छोड़ लून." मैने कहा, "मुझे इस मोमबत्ती से बहुत मज़ा आ रहा है. मेरा मज़ा बीच में मत खराब करो, प्ल्ज़. अभी मुझे मोमबत्ती से ही छोड़ो, बाद में तुम चाहे जितनी बार छोड़ लेना." वो मेरे जोश को देखकर एक दम हक्का बक्का हो गये. उन्होने मुझे उस
मोमबत्ती से छोड़ना ज़ारी रखा. मैं खूब मज़े के साथ मोमबत्ती को अपने छूट के अंदर ले रही थी. उन्होने और तेज़ी के साथ मोमबत्ती को मेरी छूट में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. 5 मिनिट भी नहीं गुजरा की मैं एक बार फिर से झाड़ गयी. मैं अब तक 4 बार झाड़ चुकी थी. वो मुझे 30-35 मिनिट में 4 बार झाड़ता हुआ देखकर सोच में पद गये क्यों की पिच्छ'ले देढ साल की चुदाई में मैं कभी कभी ही झड़ती थी. इसकी वजह
उनके लुन्ड का छोट होना था. वो मेरी छूट में मोमबत्ती को अंदर बाहर जाता हुआ देखने लगे और उनको भी मज़ा आ रहा था. मेरी छूट ने मोमबत्ती को एक दम जाकड़ रखा था. मेरे झड़ने के बाद उन्होने मोमबत्ती को मेरी छूट से बाहर निकाल लिया तो मैं बोली, "रजत, तुमने मोमबत्ती क्यों निकाल ली. प्ल्ज़, कुच्छ देर तक और अंदर बाहर करो. मुझे एक बार और झाड़ जाने दो, प्ल्ज़." उन्होने मोमबत्ती को दोबारा में छूट
में डाल दिया और बहुत ही ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगे. इस बार मैं जल्दी नहीं झाड़ रही थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं अपना चुत्तऱ उठा उठा कर पूरी मोमबत्ती को अपने छूट में ले रही थी. लगभग 20 मिनिट के बाद मैने अपना चुतऱ बहुत तेज़ी के साथ उपर उठाना शुरू कर दिया तो वो समझ गये की मैं अब फिर से झड़ने वाली हून. उन्होने मोमबत्ती को और तेज़ी के साथ मेरी छूट में अंदर बाहर करना शुरू कर
दिया. 2-3 मिनिट में ही मैं फिर से झाड़ गयी. इस बार मेरी छूट से ढेर सारा पानी आया. मैने कहा, "प्ल्ज़, मेरी छूट का सारा पानी तुम चाट लो. इस बार ये बहुत मेहनत के बाद निकला है." उन्होने मेरी छूट का सारा पानी चाट लिया और बोले, "शालिनी, अब मैं छोड़ लून." मैने कहा, "तुमने आज मुझे ज़िंदगी का वो मज़ा दिया है जिसके लिए मैं देढ साल से तड़प रही थी. अब तुम जितनी बार चाहो मुझे छोड़ो. मैं एक दम तैय्यर
हून." उनका लुन्ड तो पहले से ही खड़ा था. उन्होने मेरी छूट में अपने लुन्ड को डाला तो मोमबत्ती से छुड़वाने की वजह से उनका लुन्ड मेरी छूट में एक दम आराम से घुस गया. उनके लुन्ड पर मेरी छूट की कोई पकड़ नहीं थी और मुझे कुच्छ भी पता नहीं चल रहा था. उन्होने मुझे छोड़ना शुरू कर दिया लेकिन उनको कोई मज़ा नहीं आ रहा था. वो बोले, "मोमबत्ती से छुड़वाने के बाद तुम्हारी छूट तो एक दम ढीली हो गयी
है. मुझे मज़ा नहीं आ रहा है." मैने बहुत जोश में थी और बोली, "मेरी गान्ड अभी तक एक दम टाइट है. प्ल्ज़, अगर तुम चाहो तो मेरी गान्ड मार लो. लेकिन एक शर्त है." उन्होने पूचछा, "क्या." मैने कहा, "हम एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और हूमें एक दूसरे के दर्द का एहसास भी है. मुझे मोमबत्ती से छुड़वाने में बहुत मज़ा आया. लेकिन असली लुन्ड से जो मज़ा आएगा वो मोमबत्ती में कहाँ है. तुम मेरे लिए किसी
आदमी का इंतेज़ाम कर दो जिसका लुन्ड लंबा और मोटा हो. मैं प्रॉमिस करती हून की तुम्हारे अलावा मैं पूरी ज़िंदगी केवल उस आदमी से ही चड़वौनगी." वो सोच में पद गये. थोड़ी देर बाद वो बोले,
"ठीक है. बाद में बता दूँगा." मैने कहा, "ठीक है. तुम मेरी गान्ड मार लो." मैं पेट के बाल लेट गयी. उन्होने अपने लुन्ड पर तोड़ा सा थूक लगाया और मेरी गान्ड के च्छेद पर रख दिया. मैने अपना चुतऱ और उपर उठा दिया जिस से उनका लुन्ड आराम से पूरा मेरी गान्ड में घुस जाए. उन्होने एक धक्का मारा तो मुझे दर्द होने लगा और मेरे मून'ह से एक चीख निकल गयी. उनका लुन्ड तो बहुत छोट था ही. एक ही धक्के में मेरी
गान्ड में आधे से ज़्यादा घुस गया. उन्होने और ज़्यादा नहीं डाला और मेरी गान्ड में अपने लुन्ड को अंदर बाहर करने लगे. मेरा दर्द 2 मिनिट में ही कम हो गया और मैं शांत हो गयी. मुझे मज़ा आने लगा और मैं अपना चुत्तऱ उठा उठा कर उनसे गान्ड मराने लगी. उनको भी मज़ा आने लगा. उन्होने फिर एक ज़ोरदार धक्का मार दिया तो उनका पूरा लुन्ड मेरी गान्ड में घुस गया. मेरी गान्ड बहुत ही टाइट थी. पूरा लुन्ड
घुसते ही मुझे बहुत तेज़ दर्द होने लगा और मैं चिल्लाने लगी. लेकिन वो बहुत जोश में थे और रुके नहीं. उन्होने तेज़ी के साथ अपने लुन्ड को मेरी गान्ड में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कुच्छ कम हो गया और मुझे मज़ा आने लगा... मैं अपनी गान्ड उपर उठा उठा कर उनका साथ देने लगी. आज उनके छोटे से लुन्ड से मुझे गान्ड मराने में बहुत मज़ा आ रहा था. मैने कहा, "रजत, तुम्हारा छोट
लुन्ड तो मेरी गान्ड के ही लायक है. ये मेरी गान्ड में बहुत टाइट है. मुझे खूब मज़ा आ रहा है. जब मुझे कोई दूसरा छोड़ेगा तो मेरी छूट तुम्हारे लुन्ड के लायक नहीं रह जाएगी, यह एक दम ढीली हो जाएगी. तुम मेरी गान्ड मार लिया करना. इस से तुम्हें भी मज़ा आएगा और मैं भी गान्ड मराने का मज़ा ले पौँगी." वो बोले, " ठीक है मेरी शालू रानी. 10 मिनिट तक मेरी गान्ड मरने के बाद वो मेरी गान्ड में ही झाड़ गये.
आज मुझे बहुत मज़ा आया था. उन्होने अपना लुन्ड जैसे ही मेरी गान्ड से बाहर निकाला तो मैने बड़े प्यार से उनका लुन्ड चाटना शुरू कर दिया. इतने प्यार से आज तक मैने उनका लुन्ड कभी नहीं छाता था. उन्हें खूब मज़ा आने लगा. उसके बाद हम थोड़ी देर तक आराम करते रहे. 15 मिनिट बाद मैने उनके लुन्ड को फिर से चूसना शुरू कर दिया. वो बहुत जोश में आ गये और बोले, "आज तुम मुझसे दोबारा चुड़वावगी क्या." मैने
कहा, "हन, अभी तुमने मेरी गान्ड मारी है अब छूट का भी मज़ा ले लो." लगभग 10 मिनिट तक मैं उनका लुन्ड चूस्टी रही. उनका लुन्ड फिर से खड़ा हो कर टन गया था. उन्होने मुझे लिटा कर छोड़ना शुरू कर दिया. उनका लुन्ड मेरी छूट में एक दम ढीला पद रहा था लेकिन वो मुझे छोड़ते रहे. छूट में लुन्ड के ढीला होने की वजह से मुझे बहुत कम मज़ा आ रहा था. उनके लुन्ड पर मेरी छूट की पकड़ एक दम ढीली पद गयी थी. इस वजह से
वो जल्दी झाड़ नही रहे थे और मैं भी नहीं झाड़ रही थी. वो मेरी चुचियों को बहुत ज़ोर ज़ोर से मसल रहे थे. उन्होने मुझे आज लगभग 1 घंटे तक छोड़ा. मैं भी आज बहुत खुश थी क्यों की उन्होने मुझे पहले कभी इतनी देर तक नहीं छोड़ा था. वो मुझे कभी भी 10 मिनिट से ज़्यादा नहीं छोड़ पाते थे. वो जल्दी झाड़ जाते थे. आज ज़्यादा टाइम लगने की वजह से उनको भी बहुत मज़ा आ रहा था. लगभग 10 मिनिट और छोड़ने के बाद वो
झाड़ गये. आज मैं भी उनकी चुदाई से बहुत मस्त हो गयी थी और 2 बार झाड़ चुकी थी.. छोड़ने के बाद जब वो मेरे उपर से हटे तो तुरंत ही मैने उनके लुन्ड को बड़े प्यार से चाटना शुरू कर दिया. आज हम दोनो बहुत खुश थे. थोड़ी देर बाद हम सो गये. दूसरे दिन जब वो मुझे मोमबत्ती से छोड़ने लगे तो मैं बोली, तुमने मेरे बारे में कुच्छ सोचा." वो बोले, "मेरा एक दोस्त है जिस'का नाम केशरी है. वो मेरे बचपन का दोस्त
है, वो कैसा रहेगा. हम लोग जब छोटे थे तो अपनी च्छूननी लुन्ड को एक दूसरे की च्छूननी से नापते थे. उस समय मेरे सभी दोस्तों में केशरी की च्छूननी सबसे लंबी और मोटी थी. उसकी च्छूननी सबसे ज़्यादा गोरी भी थी. अब तक उसकी च्छूननी एक लंबा और मोटा लुन्ड बन चुकी होगी. अगर तुमको केशरी पसंद हो तो मैं उस से बात कर लून. अभी केशरी की शादी भी नहीं हुई है." मैने कहा, "केशरी तो बहुत हॅंडसम है और गोरा भी.
अगर केशरी की च्छूननी उस समय सबसे लंबी और मोटी थी तो अब वो खूब लंबा और मोटा लुन्ड बन गया होगा. सबसे अच्च्ची बात है की केशरी तुम्हारा दोस्त भी है. तुम लोग बचपन में केवल एक डूस'रे की नूनी ही नाप'ते थे या आपस में गान्ड मारा मारी भी कर'ते थे? वो बोले, "केशरी ही कभी कभी मेरी गान्ड मार'ता था. वा अक्सर कह'ता रह'ता है यार तुम'ने शालिनी भाभी के रूप में गजब की चीज़ पाई है. वा तुम पर पहले से फिदा
है . मेरा समान पॅक कर देना. मुझे एक साप्ताह के लिए बाहर जाना है." मैने उनका समान पॅक कर दिया. दुकान बंद होने के बाद रात 8 बजे घर आए तो मैने पूचछा, "मेरे काम का क्या हुआ.." वो बोले, "अभी मैने केशरी से बात नहीं की है. वापस अवँगा तो बात कर लूँगा." मैं उदास हो गयी. तुम मेरा खाना निकाल दो. मैने खाना निकाल दिया और वो खाना खाने लगे. खाने के बाद जब वो जाने लगे तो मैं उनको दरवाज़े पर छ्चोड़ने आई.
मेरा चेहरा एक दम बुझा हुआ था और मैं एक दम उदास थी.. उन्होने मेरी तरफ देखा तो बोले, "मैने केशरी से बात कर ली है.. यह सुन'के वा इट'ना खुश हुवा की मत पुच्च्ो. वो लगभग 10 बजे आएगा. मेरे वापस आने तक तुम केशरी से जी भर कर छुड़वा लेना." मैं खुशी से फूली नहीं समा रही थी. मैने उनके होठों पर एक चुंबन जड़ दिया और कहा, "ठीक है." मैं केशरी का इंतेज़ार करने लगी. मैं खुशी से एक दम पागल हो रही थी. मैं बहुत
जोश में थी और मैने अपनी सारी और ब्लाउस को उतार दिया. मैं केवल पेट्त्यकोआट और ब्रा में थी और खुशी के मारे डॅन्स करने लगी. रात के 10 बजे कल्लबेल्ल बाजी तो मैने धऱक'ते दिल से दरवाज़ा खोला. वो केशरी था. मैं उसे देखकर मुस्कुराई और वो भी मुस्कुराया. मैने दरवाज़ा लॉक कर दिया. केशरी मुझे अपनी बाहों में जाकड़ लिया. उसने अपने होठों को मेरे होठों पर रख दिया. मैं जोश में आने लगी. उसने मेरी
पीठ पर अपना हाथ फिरना शुरू कर दिया और मेरे होठों को चूमने लगा. मैने भी उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया. उसने मेरे होठों को चूमने के बाद मेरे गाल और मेरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. मैं जोश में आ गयी और सिसकारियाँ भरने लगी, "ऑफ... केशरी..... ओह...... और..... चूमओ...... .. ." उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और उसे उतारने लगा. मैने अपने हाथ उपर कर दिए जिस से वो मेरी ब्रा को उतार सके. उसने ब्रा को उतार कर
फेक दिया. अब मैं केवल पेटिकोट में उसके सामने थी. उसने मेरी एक चूची को अपने हाथ में पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से मेरी पीठ को सहलाने लगा. उसने पयज़ामा और कुर्ता पहन रखा था. उसका लुन्ड पयज़ामे के अंदर ही खड़ा हो कर टन गया था. मैं उसका लुन्ड अपने छूट के पास महसूस कर रही थी. वो बहुत बड़ा लग रहा था. मैं भी उसके पीठ को सहला रही थी. उसने मेरी पीठ को सहलाने के बाद मेरी कमर को
सहलाना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद उसने मेरे पेट्त्यकोआट के नाडे पर अपना हाथ रखा. मैं एक दम जोश में थी. मैं समझ गयी की अब वो मेरा पेट्त्यकोआट खोलने वाला है. उसने पेट्त्यकोआट के नाडे को झटके से खीच लिया तो मेरा पेट्त्यकोआट खुल कर नीचे ज़मीन पर गिर गया. मैने पनटी जानबूझ कर नहीं पहनी थी.. अब उसके सामने एक दम नंगी हो गयी थी. उसने अपना एक हाथ मेरी छूट पर लगाया तो मेरे मून'ह से
सिसकारियाँ निकालने लगी, ऑफ......... . केशरी...... .. हाए....... ओह......... . वो मेरी छूट को सहलाने लगा. मैने उसे अपनी तरफ खीच लिया और उसके चुत्तऱ पर हाथ फिरने लगी. उसने एक उंगली मेरी छूट में डाल दी. मेरी छूट एकदम गीली होने लगी. मैने उसके पयज़ामे के नडे को खोलने लगी. उसका पयज़ामा खुलने के बाद नीचे ज़मीन पर गिर गया. उसने भी अंदर कुच्छ नहीं पहना था. वो नीचे से एक दम नंगा हो गया. मैने कहा,
"क्या तुम नीचे कुच्छ नहीं पहनते हो." वो बोला, "पहनता हून भाभी. लेकिन मुझे आज तुम्हारी छूट का न्योता मिला था, मेरा बस चल'ता तो नंगा ही दौऱ आता. जल्दी में मैने केवल कुर्ता और पयज़ामा ही पहना. मैने अपना हाथ उसके लुन्ड पर फिरना शुरू किया. उसका लुन्ड बहुत लंबा और मोटा था लेकिन अभी मैने उसे देखा नहीं था. केवल अपने हाथों से महसूस कर रही थी. मैने उसके लुन्ड को सहलाना शुरू कर दिया. उसने
मुझे अपनी बाहों में ज़ोर से जाकड़ लिया. वो अभी भी अपनी एक उंगली को मेरी छूट में अंदर बाहर कर रहा था. मेरे बदन में सिहरन सी हो रही थी. थोड़ी देर में उसने अपनी उंगली बाहर निकल ली फिर अपनी दो उंगली मेरी छूट में डाल दी. अब मुझे कुच्छ दर्द सा होने लगा. मैं सिसकारियाँ भर रही थी, अफ....... उम्म........ ऑश....... .... . मेरे सहलाने पर उसका लुन्ड और ज़्यादा टाइट हो रहा था. मैं उसके बदन से एक दम चिपकना चाहती
थी लेकिन उसने अभी भी कुर्ता पहना हुआ था. मैने उसके कुर्ते को नीचे की तरफ खीचा तो वो समझ गया. उसने अपना कुर्ता भी उतार दिया. अब हम दोनो एक दम नंगे थे. मैं उस से एक दम चिपक गयी. मैने अभी तक उसका लुन्ड नहीं देखा था. मैने उसके लुन्ड को अपने हाथों में ज़ोर से पकड़ लिया और आयेज पीच्चे करने लगी. उसका लुन्ड एक दम गरम था. वो मेरी छूट में अपनी दो उंगली डाल कर अंदर बाहर कर रहा था. मैं बहुत जोश
में आ गयी और 2 मिनिट बाद ही मेरी छूट से पानी निकल गया. वो नीचे ज़मीन पर बैठ गया और मेरी छूट के पानी को चाटने लगा. सारा पानी चाटने के बाद भी वो रुका नहीं और मेरी छूट को चट्टा रहा. मैं पागल सी होने लगी. मैने उसके बलों में अपना हाथ फिरना शुरू कर दिया और उसके सर को पकड़ कर अपनी छूट की तरफ दबा दिया. 5 मिनिट बाद उसने मेरी छूट को चाटना बंद कर दिया और मुझे गोद में उठा कर बेड पर ले गया और बेड के
एक किनारे बिता दिया. अब वो खड़ा होकर मेरे सामने आ गया. उसका लुन्ड एक दम मेरे मून'ह के पास था. मैने अब जाकर उसके लुन्ड को पहली बार देखा. उसका लुन्ड एक दम गोरा था और लगभग 8" लंबा और 2 1/2" मोटा था. मैने ऐसा लुन्ड पहले कभी नहीं देखा था. मैने बिना उसके कुच्छ कहे ही उसके लुन्ड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. वो मेरे बलों में अपना हाथ फिरने लगा. कुच्छ देर चाटने के बाद मैने उसके लुन्ड को
अपने मून'ह में ले लिया और चूसने लगी. मैं जोश से एक दम पागल हो रही थी. उसका लुन्ड अपनी छूट में अंदर लेने के लिए बेताब हो रही थी. वो समझ गया. उसने मुझे लिटा दिया और मेरी टाँगों के बीच आ गया. उसने मेरी चुतऱ के नीचे 2 तकिये रख दिए तो मेरी छूट एक दम उपर उठ गयी. उसने मेरी टाँगों को फैलाया और अपने लुन्ड का सूपड़ा मेरी छूट के बीच रख दिया. मैं बहुत जोश में आ गयी बोली, "केशरी, अब बर्दस्त नहीं हो
रहा है. डाल दो अपना पूरा लुन्ड मेरी छूट में और खूब छोड़ो मुझे." केशरी ने अपने लुन्ड को मेरी छूट के अंदर डालना शुरू कर दिया. उसका लुन्ड मेरी छूट में केवल 2" ही घुसा था की मुझे हल्का हल्का दर्द होने लगा. केशरी ने मेरी छूट में अपने लुन्ड को घुसना शुरू कर दिया. मैं तो पहले ही मोमबत्ती से छुड़वा चुकी थी. इस लिए मुझे अभी ज़्यादा दर्द नहीं हो रहा था. तोड़ा दर्द इस लिए हो रहा था क्यों की
केशरी का लुन्ड मोमबत्ती से बहुत ज़्यादा मोटा था. केशरी ने एक धक्का लगाया तो उसका लुन्ड मेरी छूट में 4" तक घुस गया. मेरे मून'ह से हल्की हल्की चीख निकालने लगी. उसने जब तोड़ा सा और अंदर डाला तो मेरे मून'ह से एक ज़ोरदार चीख निकल गयी. केशरी का लुन्ड अब मेरी छूट में 6" तक घुस चुका था. उसने और ज़्यादा लुन्ड घुसने की कोशिश नहीं की और मुझे छोड़ने लगा. पहले उसने धीरे धीरे धक्का लगाया. जब
मेरा दर्द कुच्छ कम हुआ तो मैं जोश में आ गयी. जब मैने अपना चुतऱ उपर उठना शुरू कर दिया तो उसने तेज़ी के साथ मुझे छोड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी देर तक छुड़वाने के बाद मुझे और ज़्यादा मज़ा आने लगा. मैने अपना चुतऱ उठा उठा कर केशरी का साथ देना शुरू कर दिया. मेरे चुतऱ उठाते ही केशरी ने और तेज़ी के साथ छोड़ना शुरू कर दिया. वो अपने दोनो हाथों से मेरी चुचियों को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से मसल रहा
था और धक्के पर धक्के लगते हुए मुझे छोड़ रहा था. बीच बीच में वो एक धक्का ज़ोर से मार देता था जिस से उसका लुन्ड मेरी छूट में और ज़्यादा अंदर तक घुस जाता था. मेरी साँसें बहुत तेज़ चल रही थी. मेरा सारा बदन उसकी चुदाई से ज़ोर ज़ोर से हिल रहा था. मैं बहुत जोश में आ गयी थी और मुझे अब दर्द का कोई एहसास नहीं रह गया था. 8-10 मिनिट की चुदाई के बाद उसका पूरा लुन्ड मेरी छूट में घुस चुका था. मैं
उसके लुन्ड के सूपदे को अपनी बच्चेड़नी के मून'ह पर महसूस कर रही थी, जिस से मुझे और ज़्यादा मज़ा आ रहा था. मैं अपना चुतऱ उठा उठा कर उसके हर धक्के का जवाब दे रही थी. 2-3 मिनिट बाद मैं झाड़ गयी लेकिन वो रुका नहीं. मुझे छोड़ता रहा. 10 मिनिट तक छुड़वाने के बाद मैं फिर से झाड़ गयी. मेरी छूट एक दम गीली हो चुकी थी. केशरी मेरे उपर से हट गया तो मैने पूचछा, "अभी तो तुम्हारे लुन्ड का पानी भी नहीं
निकला है. तुम हट क्यों गये." वो बोला, "तुम्हारी छूट एक दम गीली हो गयी है. पहले इसे कपड़े से सॉफ कर डून, उसके बाद फिर छोड़ूँगा." उसने बेड पर से चदडार उठा ली और मेरी छूट सॉफ करने लगा.. मेरी छूट को सॉफ करने के बाद उसने अपना लुन्ड फिर से मेरी छूट में डालना शुरू किया. मेरी छूट सॉफ होने के बाद एक दम सूख गयी थी, इस लिए मुझे फिर से दर्द होने लगा. केशरी ने मेरे दर्द की कोई परवाह नहीं की और अपना
लुन्ड मेरी छूट में घुसता रहा. मैं तोड़ा सा चिल्लाई लेकिन वो रुका नहीं. पूरा लुन्ड मेरी छूट में घुसने के बाद वो मुझे छोड़ने लगा. थोड़ी देर में मेरा दर्द फिर से कम हो गया तो मैं उसका साथ देने लगी. मैने अपने चुतऱ को उसके हर धक्के के साथ उठना शुरू कर दिया. मेरे चुतऱ उठाते ही उसका लुन्ड एक दम ज़द तक मेरी छूट में घुस जाता था और मैं उसके दोनो बॉल्स को अपनी गान्ड पर महसूस करने लगती थी.
लगभग 20 मिनिट तक वो मुझे इसी तरह छोड़ता रहा. इस बीच मैं 2 बार और झाड़ चुकी थी. मेरी छूट फिर से गीली हो गयी थी. केशरी ने अपना लुन्ड बाहर निकल कर मेरी छूट को फिर से सॉफ किया. फिर उसने अपने लुन्ड के सूपदे को मेरी छूट के बीच रखा. फिर उसने अपने दोनो हाथों से मेरी चुचियों को ज़ोर से पकड़ लिया और एक ज़ोरदार धक्का मारा. मेरे मून'ह से एक ज़ोर की चीख निकली और उसका पूरा का पूरा लुन्ड मेरी छूट
में समा गया. उसने बिना देर किए मेरी चुचियों को ज़ोर ज़ोर से मसालते हुए बहुत ही तेज़ी के साथ मेरी चुदाई शुरू कर दी. मैं हिचकोले खाने लगी. उसका पूरा लुन्ड मेरी छूट के अंदर बाहर हो रहा था. मैं एक दम ज़न्नत का मज़ा ले रही थी. जब उसका पूरा लुन्ड मेरी छूट में जाता तो मैं उसके दोनो बॉल्स को अपनी गान्ड पर महसूस करती. मैं भी अपना चुतऱ उठा उठा कर उसके ताल से ताल मिलने लगी. लगभग 20 मिनिट तक वो
मुझे छोड़ता रहा और फिर मेरी छूट में ही झाड़ गया. इस दौरान मैं 2 बार फिर झाड़ चुकी थी. अपने लुन्ड का पूरा पानी निकल जाने के बाद वो हटा तो मैने उसका लुन्ड छत छत कर सॉफ कर दिया. मैं एक दम तक कर चूर हो गयी थी और बेड पर ही लेट गयी. वो भी मेरे बगल में लेट गया. मुझे आज ज़िंदगी में पहली बार चुदाई का असली मज़ा मिला था. undefined30 मिनिट तक आराम करने के बाद केशरी ने फिर से मेरी छूट को सहलाना शुरू कर
दिया. मैं समझ गयी की वो मुझे फिर से छोड़ना चाहता है. मैं उसके उपर आ कर 69 की पोज़िशन में हो गयी. मैने उसके लुन्ड को मून'ह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और वो मेरी छूट को चाटने लगा. 5 मिनिट बाद ही हम दोनो फिर से तैय्यर हो गये. इस बार केशरी ने मुझे डॉगी स्टाइल में कर दिया और खुद मेरे पीच्चे आ गया. उसने मेरी छूट को फैला कर अपना लुन्ड बीच में फँसा दिया और मेरी कमर को ज़ोर से पकड़ लिया. फिर वो
मुझसे बोला, "तुम तैय्यर हो जाओ, जानेमन. तुमको अब फिर से दर्द होने वाला है. मैं अब बिना रुके तुम्हारी छूट में अपना पूरा लुन्ड डाल कर तुम्हारी चुदाई करने वाला हून. मैने कहा, "मेरी जान, मैं तैय्यर हून. मैने आज ज़िंदगी में पहली बार चुदाई का मज़ा तुमसे पाया है. शादी के बाद आज तक मैं एक दम भूखही थी. आज तुमने मेरी भूख को शांत किया है. तुमने आज मेरी चुदाई करके मेरे जोश को और भी भड़का दिया
है. चिल्लाने दो मुझे. तुम मेरे चिल्लाने की परवाह मत करना. डाल दो अपना पूरा लुन्ड एक झटके से ही मेरी छूट में. खूब ज़ोर ज़ोर से छोड़ो मुझे." उसने मेरी कमर को पकड़ कर एक ज़ोरदार धक्का मारा. अभी उसका केवल आधा लुन्ड ही मेरी छूट में घुस पाया था की मेरे मून'ह से चीख निकल गयी. वो रुका नहीं. वो धक्के पर धक्का लगाने लगा और में चिल्लती रही. वो रुका नहीं. 8-10 धक्कों के बाद उसका पूरा लुन्ड मेरी
छूट में घुस गया. उसने मुझे तेज़ी के साथ छोड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में जब मेरा दर्द कुच्छ कम हुआ तो मैं भी अपना चुतऱ आयेज पीच्चे करके उसका साथ देने लगी. वो मुझे आँधी की तरह छोड़ रहा था. उसने इस बार मुझे लगभग 45 मिनिट तक बिना रुके छोड़ा. अभी तक मैं 3 बार झाड़ चुकी थी. मेरी छूट एक दम गीली हो चुकी थी. रूम में फ़च-फ़च और धाप-धाप की आवाज़ हो रही थी. केशरी का भी पानी अब निकालने ही वाला
था. उसने मेरी कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया और अपनी स्पीड बहुत तेज़ कर दी. मैने भी अपना चुतऱ और तेज़ी के साथ आयेज पीच्चे करना शुरू कर दिया. लगभग 5 मिनिट और छोड़ने के बाद केशरी मेरी छूट में झाड़ गया और मैं भी एक बार फिर केशरी के साथ ही साथ झाड़ गयी. सारा पानी मेरी छूट में निकालने के बाद केशरी ने अपना लुन्ड बाहर निकाला तो मैने उसे चाटना शर कर दिया. मैने उसका लुन्ड खूब चटा और एक दम सॉफ
कर दिया. मैने रजत के आने तक केशरी से एक साप्ताह तक खूब चुडवाया और खूब मज़ा लिया. अभी भी मैं केशरी को बुला कर खूब चुड़वति हून.

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Posted By raj 007 to hindi sexi stori at 10/04/2008 04:36:00 AM __._,_.___
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